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आमतौर पर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦ तीन पà¥à¤°à¤•ार से होता है ।
* चोट के कारण
* गठिया
* वजन बढ़ने के कारण
चोट का दरà¥à¤¦
जीवन में à¤à¤¸à¤¾ हर किसी के साथ कईं बार होता है कि राह चलते, घर पर बैठे हà¥à¤, खेलते हà¥à¤, वाहन चलाते हà¥à¤, फिसलने की वजह से या दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤µà¤¶ कà¤à¥€-कà¤à¥€ घà¥à¤Ÿà¤¨à¤¾ चोटिल हो जाता है । à¤à¤¸à¤¾ होना à¤à¤• समानà¥à¤¯-सी घटना है जो आठदिन होती ही रहती है और बाहरी चोट लगने पर हम इसे मामूली समà¤à¤¨à¥‡ की à¤à¥‚ल à¤à¥€ कर लेते हैं ।
दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤µà¤¶ लगी à¤à¤¸à¥€ चोटों में हमें कईं दिनों तक दरà¥à¤¦ का आà¤à¤¾à¤¸ होता रहता है, लेकिन हम इसपर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं देते और जब दरà¥à¤¦ बड़ जाता है तब कà¥à¤› घरेलू इलाज जैसे– आइसिंग या गरà¥à¤® पटà¥à¤Ÿà¥€,नी कैप लगाना और कà¥à¤°à¥‡à¤ª बैंडेज बांधने जैसे तरीके अपनाते हैं परंतॠकिसी डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ नहीं करते ।
हम सबको इसका आà¤à¤¾à¤¸ नहीं कि यह कितना जोखिम à¤à¤°à¤¾ हो सकता है । यदि हम कà¥à¤› बातों पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, तो छोटी-मोटी चोट से उपजे दरà¥à¤¦ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पा सकते हैं ।
गठिया
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में गठिया होना à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ है और इसकी वजह à¤à¤• ही है – लापरवाही । जब घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ का दरà¥à¤¦ लंबे समय तक रहता है, तो गठिया होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है । गठिया घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ में चोट, बढ़ती उमà¥à¤°, मोटापे, कमजोर हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, डायबिटीज और शरीर में यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के बढ़ जाने के कारण होता है । अगर आपके शरीर में à¤à¥€ यह सब समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ है तो बहà¥à¤¤ संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है कि आपको गठिया हो सकता हैं। अगर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में गठिया बढ़ जाठतो रोगी को असहनीय पीड़ा के साथ-साथ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ खराब होने की चिंता à¤à¥€ लगी रहती है ।
अधिक वज़न
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ दरà¥à¤¦ के जिनते à¤à¥€ मालले सामने आते हैं, उनमें से 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ की वजह बढ़ा हà¥à¤† वजन यानि मोटापा होता है । इसमें हैरत की बात नहीं है कि यह कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है । घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ में वजन सहने की अपनी à¤à¤• सीमा होती है और जब यह सीमा टूट जाती है तो घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ जवाब दे देते हैं । उसके बाद वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ दवाईयों और सहारे के बिना चलने में असमरà¥à¤¥ हो जाता है।
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